IGAF: जबलपुर में किसानों की स्लॉट समस्या और खरीदी केन्द्र मैपिंग

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जबलपुर में किसानों की स्लॉट समस्या और खरीदी केन्द्र मैपिंग

📅 Tuesday, April 21, 2026 | ✍️ India google all farmate
जबलपुर में किसानों की स्लॉट समस्या और खरीदी केन्द्र मैपिंग

जबलपुर में किसानों की स्लॉट समस्या और खरीदी केन्द्र मैपिंग

समस्या का विस्तार

जबलपुर जिले में गेहूँ उपार्जन प्रक्रिया इस वर्ष गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। किसानों की सबसे बड़ी समस्या खरीदी केन्द्रों की बार‑बार बदलती मैपिंग और उससे जुड़े स्लॉट बुकिंग नियमों के कारण उत्पन्न हुई है।

स्लॉट बुकिंग की स्थिति

  • छोटे किसानों (2 हेक्टेयर से नीचे) के स्लॉट बुक हो रहे हैं।
  • लेकिन जिन किसानों की ज़मीन 5 एकड़ या 2 हेक्टेयर से अधिक है, उनके स्लॉट अब तक बुक नहीं हो पाए हैं।
  • खरीदी शुरू हुए 10 दिन हो चुके हैं, फिर भी बड़े किसानों के स्लॉट लंबित हैं।

मैपिंग बदलाव का असर

किसान पहले नजदीकी केन्द्रों पर स्लॉट बुक करते हैं। प्रशासन मैपिंग बदल देता है → किसान मजबूरी में स्लॉट डिलीट कर नया स्लॉट लेते हैं। दूसरी बार डिलीट करने की अनुमति नहीं होने से किसान दूरस्थ केन्द्रों (60–65 किमी) पर जाने को मजबूर हो जाते हैं।

केंद्र नियुक्ति की समस्या

  • कई जगह खरीदी केन्द्र अभी तक नियुक्त नहीं हुए हैं।
  • वेयरहाउस खरीदी केन्द्र बनने से इनकार कर रहे हैं।
  • कुछ स्थानों पर प्रांगण की समस्या है, जिसके कारण केन्द्र स्थापित नहीं हो पा रहे।

किसानों पर प्रभाव

  • छोटे किसानों के लिए लंबी दूरी पर फसल ले जाना लगभग असंभव।
  • ट्रॉली और डीज़ल खर्च बहुत अधिक बढ़ गया है।
  • समय और श्रम की भारी हानि हो रही है।
  • बड़े किसानों के स्लॉट लंबित रहने से उनकी उपज बेचने में देरी हो रही है।

किसानों की मांग

  • खरीदी केन्द्रों की मैपिंग बार‑बार बदलना तुरंत रोका जाए।
  • प्रभावित किसानों को विशेष अनुमति देकर स्लॉट संशोधन/डिलीट की सुविधा दी जाए।
  • बड़े किसानों के स्लॉट शीघ्र खोले जाएँ।
  • खरीदी नजदीकी केन्द्रों पर ही सुनिश्चित की जाए।
  • वेयरहाउस और प्रांगण की समस्या का तत्काल समाधान कर केन्द्रों की नियुक्ति की जाए।

प्रशासन को दी गई जानकारी

किसानों ने यह समस्या जबलपुर कलेक्टर को लिखित रूप से बताई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि इस समस्या का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

निष्कर्ष

यह समस्या केवल तकनीकी नहीं है, बल्कि किसानों के लिए गंभीर आर्थिक संकट बन चुकी है। प्रशासन को चाहिए कि नियमों में लचीलापन लाए, प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करे और केन्द्र नियुक्ति व स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारु बनाए।

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